भोपाल
रदेश में 2 हजार 772 प्राइमरी और मिडिल स्कूल अतिथि और 12 हजार 209 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। मैदानी अफसरों की इस रिपोर्ट को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिशेष शिक्षक एवं अध्यापकों को इन स्कूलों में भेजने का निर्णय लिया है। इनकी पोस्टिंग जुलाई के पहले हफ्ते तक हो जाएगी। वहीं विभाग अध्यापकों के तबादले 15 जून के बाद शुरू करेगा।
विभाग पिछले डेढ़ महीने से युक्तियुक्तकरण की कार्यवाही कर रहा है। हाल ही में जारी सूची के मुताबिक प्राइमरी में 22 हजार 457 और मिडिल में 33 हजार शिक्षक-अध्यापक अतिशेष निकले हैं। हालांकि मिडिल में सिर्फ 4051 शिक्षक-अध्यापक ही अतिशेष माने जा रहे हैं, क्योंकि शेष शिक्षक तय विषय की पढ़ाई करा रहे हैं, जिन्हें विभाग डिस्टर्ब नहीं करना चाहता है। विभाग को डर है कि ऐसा करने पर स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था चरमरा जाएगी। उल्लेखनीय है कि विभाग लंबे समय और तय सेटअप से ज्यादा शिक्षकों को अतिशेष मान रहा है।
शहरी क्षेत्रों से नहीं हटेंगे अध्यापक
विभाग शहरी क्षेत्रों से अध्यापकों को नहीं हटाएगा। उनकी बजाय अतिशेष की सूची में शामिल नियमित शिक्षक हटाए जाएंगे। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अध्यापकों को अतिशेष मानकर हटाया जाएगा। अफसरों का तर्क है कि शहरी क्षेत्रों में ऐसे स्कूलों की संख्या काफी कम है, जिनमें एक भी शिक्षक न हो। इसलिए यहां के अतिशेष शिक्षकों को बाहर भेजना पड़ेगा, जबकि अध्यापक नगरीय निकाय के कर्मचारी हैं, उन्हें बाहर नहीं भेजा जा सकता है, इसलिए शिक्षकों को हटाएंगे।
आदिवासी ब्लॉक में शिक्षकों की कमी
एक शिक्षक या अतिथि शिक्षक के भरोसे चलने वाले स्कूल पूरे प्रदेश में हैं, लेकिन आदिवासी विकासखंडों में ऐसे स्कूलों की संख्या ज्यादा है। विभाग युक्तियुक्तकरण से इन स्कूलों के खाली पद भरने की कोशिश कर रहा है। यदि इस प्रक्रिया से भी पद नहीं भरते हैं तो पदों को तबादले से भरा जाएगा।
विषय के मान से रखेंगे अतिथि
विभाग के अफसरों का कहना है कि हर स्कूल में तय सेटअप के मुताबिक शिक्षकों की व्यवस्था कर रहे हैं। इससे विषय के भरे और खाली पदों की स्थिति साफ हो जाएगी। इसके बाद अतिथि शिक्षक भी विषय के हिसाब से रखे जाएंगे। वर्तमान में गणित में पोस्ट ग्रेजुएट आवेदकों से हिंदी तक पढ़वाई जा रही है।
सेटअप बना रहे हैं
ऐसे 15 हजार स्कूल हैं, जो अतिथि या एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इन स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले शिक्षक पहुंचाने की चुनौती है। इसीलिए युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। अभी कुछ दिक्कतें जरूर आ रही हैं, लेकिन एक बार सेटअप ठीक हुआ, तो तबादले और नई नियुक्तियों के समय दिक्कत नहीं आएगी।
– दीप्ति गौड़ मुकर्जी, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग