Home राज्य मप्र फिसलते ही वो मौत के इतने करीब गिरा, ऐसे बच गई जान

फिसलते ही वो मौत के इतने करीब गिरा, ऐसे बच गई जान

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रतलाम

चलती ट्रेन में सवार होने के प्रयास में एक यात्री अचानक पायदान से फिसलकर ट्रैक पर जा गिरा। इस बीच एक-एक कर ट्रेन के तीन डिब्बे गुजर गए। प्लेटफॉर्म पर यह नजारा देख यात्रियों की चीखें निकल गईं। आरपीएफ जवान दौड़े व यात्रियों से चेन पुलिंग के लिए कहा, वहीं गार्ड को भी संकेत कर फौरन ट्रेन स्र्कवाई। पलभर में हुए हादसे के बाद अनहोनी से भयभीत कुछ यात्रियों ने हाथ रखकर आंखे बंद कर ली थीं, जबकि कुछ यात्री कुछ देर के लिए पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

बाद में सुरक्षाकर्मी, स्टॉल कर्मचारी और स्टेशन स्टाफ सहायता के लिए दौड़े तो देखकर सभी चकित रह गए। यात्री प्लेटफॉर्म की दीवार व कोच के पहिए के पास सीधा लेटा था। उसे फौरन निकाला गया। घबराए व सुधबुध खोए यात्री को पहले प्लेटफॉर्म पर सुलाया गया। उसके बाद सिर में चोट पर मरहम-पट्टी की गई। बाद में इसे उसी ट्रेन से गार्ड के कोच में रवाना किया गया।

घटना प्लेटफॉर्म नंबर 4 की है। गुरुवार सुबह 11.35 बजे ट्रेन संख्या 22443 कानपुर-बांद्रा टर्मिनस एक्सपे्रस आई। निर्धारित ठहराव पर ट्रेन 11.55 बजे चली, तभी प्लेटफॉर्म, प्याऊ व खानपान स्टॉलों पर मौजूद यात्री सवार होने तेजी से आगे बढ़े। जनाहार स्टॉल के सामने से जनरल कोच गुजर रहा था, तभी रतलाम से बड़ोदरा के जनरल टिकट लेकर सवार हुए अस्र्ण कुमार निवासी मालभाई की चाल अहमदाबाद अचानक पायदान से फिसला। पलभर में वह खड़े-खड़े सीधे ट्रैक पर चला गया। ट्रेन ने गति पकड़ ली तथा तीन कोच गुजर गए।

यात्री को गिरते देख प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। वहां ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ कांस्टेबल मनोज मीणा दौड़े व यात्रियों से चिल्लाते हुए चेन पुलिंग करने को कहा। पीछे गार्ड कोच की ओर मौजूद कांस्टेबल एसके बोरासी ने गार्ड को फौरन ट्रेन रोकने रोकने को कहा। तभी कुछ ही सेकेंड में गार्ड एमएस शेख ने वॉकीटॉकी से ट्रेन स्र्कवाई।

लोग समझे कि नहीं बचा
ट्रेन ठहरते ही अंदर सवार दर्जनों यात्री प्लेटफॉर्म पर उतर आए। स्टेशन मास्टर एसके शर्मा, स्टेशन अधीक्षक विजयसिंह सिसौदिया, आरपीएफ पोस्ट प्रभारी राकेश कुमार यादव तथा लॉबी सुपरवाइजर कमल दवे मौके पर पहुंचे। यात्री को खिंचकर प्लेटफॉर्म पर लेटाने पर देखा तो सिर में हल्की चोंट थी।

जबकि बाकी शरीर पूरी तरह सुरक्षित था। स्टेशन मास्टर ने इसे मरहम-पट्टी की गई। यात्री की इच्छा पर उसे उसी ट्रेन में गार्ड शेख ने गार्ड कोच में अपने पास सुरक्षित बिठाया। बिस्किट व पानी बोतल देकर इसे यात्री को ट्रेन से रवाना किया गया।

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