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रेलवे की सुस्ती: एक महीने से ट्रैक पर खतरे में चल रही थीं ट्रेनें

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गुरुवार सुबह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और शिवाजी ब्रिज के बीच पटरी से उतरी रांची राजधानी एक्सप्रेस मामले में पता लगा है कि बढ़ते रेल ट्रैफिक को देखते हुए यहां 60 केजी का ट्रैक और क्रॉसिंग होनी चाहिए थीं। लेकिन यह दोनों 52 केजी की ही हैं। सेफ्टी ऑडिट में इन्हें बदलने की बात पर जोर दिया गया था, बावजूद इसके नॉर्दर्न रेलवे की ओर से इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसका एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि अगर यहां मेंटिनेंस के लिए ब्लॉक लेना पड़ा, तो बड़ी संख्या में ट्रेनों को कैंसल करना पड़ेगा।

हालांकि, शुक्रवार शाम को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने घटनास्थल और नई दिल्ली स्टेशन का दौरा किया। बताया जाता है कि उन्होंने कहा है कि सेफ्टी से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने तुरंत प्रभाव से जो भी चीजें बदलनी हैं, उन्हें ठीक करने के आदेश दिए हैं। आदेशों के बाद नॉर्दर्न रेलवे इस मामले में एक फाइनल प्लान बना रहा है कि कितनी गाड़ियों को कैंसल करने से यहां काम किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इसमें आने वाले दिनों में कुछ ट्रेनों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की जगह पुरानी दिल्ली, आनंद विहार या अन्य किसी रेलवे स्टेशन से चलाया जाएगा।

शुक्रवार शाम को भी लोकल यात्रियों और लंबी दूरी के यात्रियों को ट्रेन पकड़ने में काफी दिक्कतें हुईं। यात्रियों को ट्रेनों को पकड़ने के लिए प्लैटफॉर्मों पर ही घंटों इंतजार करना पड़ा। बताया जाता है कि जिस लाइन पर गुरुवार को रांची राजधानी का इंजन और पावर कार पटरी से उतरे थे, उस ट्रैक के बारे में कई महीनों से गैंगमेन खतरा महसूस कर रहे थे। अब इस मामले में नॉर्दर्न रेलवे के जीएम का भी कार्यभार संभाल रहीं एजीएम मंजू गुप्ता का कहना है कि शनिवार से इस हादसे की चीफ सेफ्टी ऑफिसर द्वारा जांच शुरू हो जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद पता लगेगा कि किस ऐंड पर गलती रही।

इसके बाद एक्शन लिया जाएगा। लेकिन इससे पहले जल्द से जल्द इस समस्या को दूर करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस रेल को बदलने की योजना करीब एक महीने से चल रही थी। कुछ ही दिनों में इसे बदला जाना था। यहीं दिल्ली डिविजन के डीआरएम अंशुल गुप्ता का कहना है कि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो। इसके प्रबंध किए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात से इंकार किया कि मौजूदा ट्रेक की ताकत अब इतनी नहीं रह गई थी कि वह राजधानी और अन्य ट्रेनों के वजन को सहन कर सकें। हालांकि, रेल सूत्र बताते हैं कि रेल और क्रॉसिंग दोनों की ताकत कम हो गई थी। इनकी क्षमता भी कम थी और सालों से इन्हें बदला भी नहीं गया था। हादसे के यही कारण रहे।

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